![]() |
| पर्वतराज हिमालय पर निबंध |
हिमालय का महत्त्व आदि काल से है ।
पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है । कहा जाता है कि देवाधिदेव महादेव हिमालय में
कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं । योगी यहाँ ध्यान लगाते रहे हैं । वे यहाँ की
गुफाओं में निवास कर तपस्या करते रहे हैं । हिमालय के आँचल में बद्रीनाथ, केदारनाथ, अमरनाथ आदि प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं । देश-विदेश के लाखों
लोग हर वर्ष यहाँ तीर्थयात्रा पर आते हैं । बहुत से लोग यहाँ के दर्शनीय स्थलों को
देखने के लिए तथा पर्वतीय स्थलों पर पर्यटन के लिए आते हैं । यहाँ के अनेक स्थानों
पर बर्फ पड़ती है अत: लोग यहाँ स्कीइंग, आइस हाँकी जैसे खेलों
का आनंद लेते हैं ।
पर्वतारोहियों के लिए हिमालय से अच्छी जगह
कोई और नहीं हो सकती । संसार के विभिन्न भागों के साहसी लोग सर्वोच्च पर्वत शिखर
एवरेस्ट पर चढ़ाई कर चुके हैं । अन्य पर्वत शिखरों पर चढ़ने लोग आते ही रहते हैं ।
अत: यहाँ कई प्रशिक्षण केन्द्र भी हैं जहाँ इच्छूक लोगों को हिमालय पर चढ़ने का
प्रशिक्षण दिया जाता है ।
हिमालय भारत के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है
। यदि हिमालय न होता तो भारत के अधिकांश उत्तरी भाग में मरुभूमि होती । यह हिमालय
ही है जो पूर्वी तथा दक्षिणी आर्द्र मानसूनी हवाओं को रोककर भारत के उत्तरी
राज्यों में वर्षा कराता है । इससे इन राज्यों में भरपूर फसल होती है । इन राज्यों
की सभी नदियाँ वर्षा ऋतु में जलप्लावित रहती हैं । वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद भी
गंगा, यमुना जैसी बड़ी
नदियों में जल रहता है । इसमें भी हिमालय का योगदान है । हिमालय की ऊँची चोटियों
की बर्फ सूर्य की गर्मी से पिघलकर इन नदियों में जल के रूप में आती रहती है । इस
तरह हिमालय सूखे होठों की प्यास शांत करने वाला साक्षात देवता बन जाता है ।
हिमालय मनोरम स्थल है । यहाँ प्राकृतिक
वैभव बिखरा पड़ा है । यहाँ प्रकृति अपने अनमोल खजाने मुक्त हस्त से लुटाती है ।
हिमाच्छादित पर्वत अद्भुत समाँ बाँध देते हैं । प्रात: कालीन सूर्य की किरणों से
इनकी शोभा और भी निखर आती है । देखने वाले ठगे से रह जाते हैं । थोड़े नीचे की ओर
चलें तो वनप्रांत आरंभ हो जाते हैं । देवदार, चीड़ आदि के ऊँचे-ऊँचे
पेड़ यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं । ये पेड़ जगंली जीव-जंतुओं की शरणस्थली हैं । कितने ही
जानवर यहाँ निवास करते हैं । भालू, रीछ, हाथी, बंदर, याक, जेबरा, गेंडा, चीता हिरन सब यहाँ
स्वयं को किसी हद तक सुरक्षित अनुभव करते हैं । उधर पेड़ों पर पक्षियों का कलरव
सुनाई देता है । छोटी-छोटी नदियाँ, ऊँचे पहाड़, गहरी खाइयाँ, पेड़, पशु, पक्षी आदि मिलकर अद्भुत प्राकृतिक दृश्य
उपस्थित करते हैं ।
हिमालय की तराई में अनेक गाँव और शहर बसे
हैं । पहाड़ी लोग भेड़-बकरियाँ बड़ी संख्या में पालते हैं । इन पालतू पशुओं के लिए
हिमालय में चारागाह होता है । स्थानीय लोग हिमालय से कई प्रकार की जड़ी-बूटियाँ
प्राप्त करते हैं । हिमालय के वनों से कीमती लकड़ियाँ, गोंद तथा पत्ते प्राप्त होते हैं ।
लकड़ियों की बहुतायत लकड़ी के ढलवाँ घर बनाने में मदद करती है । इन वनों से दियासलाई
की लकड़ी तथा कागज बनाने की लुगदी भी प्राप्त होती है ।
हिमालय क्षेत्र में बहुत ठंड पड़ती है ।
गर्मियों में भी यहाँ अधिक गर्मी नहीं पड़ती । इसलिए मैदानी इलाके के लोग यहाँ
गर्मी की छुट्टियों बिताने आते हैं । अत: यहाँ पर्यटन व्यवसाय फलता-फूलता रहता है
।
हिमालय हमारी शान है । इसकी शान में मानव
खलल डाल रहा है । वह यहाँ के वनों को नष्ट कर रहा है । वह उद्योगों के फैलाव से
यहाँ की नदियों तथा अन्य प्राकृतिक स्थलों को गंदा कर रहा है । अवैध रूप से शिकार
हो रहे हैं जो जगंली जीवों के जीवन के लिए घातक हैं । ग्रीन हाऊस गैसों के निरंतर
प्रसार से तापमान में वृद्धि हो रही है जिसके प्रभाव से यहाँ की बर्फ पिघल रही है
। इन सबके बारे में हमें जागरूक होना पड़ेगा । लोगों को हिमालय की रक्षा के लिए
उपयुक्त कदम उठाने होंगे ।
1-हिमालय से नदियों को वर्ष भर जल मिलता है, जिससे भारत हरा-भरा बना हुआ है।
2-हिमालय रूस की ओर से आने वाली उत्तर की
ठंडी हवाओं को रोकता है, जिससे देश की जलवायु
बिगडऩे नहीं पाती।
3-हिमालय से टकराकर मानसून भारत में वर्षा
कराता है।
4-पूरे हिमालय क्षेत्र में बड़े-बड़े जंगल
हैं, जिनसे इमारती और
जलाने की लकडिय़ां प्राप्त होती हैं।
5-हिमालय क्षेत्र में उपयोगी जड़ी-बूटियां
पाई जाती हैं, जिससे औषधियां तैयार
की जाती हैं।
6-हिमालय क्षेत्र में अनेक खाने हैं, जिनसे देश की समृद्धि बढ़ती है।
7-हिमालय क्षेत्र में बहुत से जंगली पशुओं को
पाया जाता है। जिनका चमड़ा, मांस और हड्डियां काम
आती हैं।
8-हिमालय उत्तर से आने वाले शत्रुओं से देश
की रक्षा करता है।
9-अपनी सुंदरता और प्राकृतिक छटा के कारण
हिमालय ने कवियों को प्रेरणा दी है। कवि तुलसीदास इससे विशेष रूप से प्रभावित थे।

1 टिप्पणी:
Lovely💕😍 sir
एक टिप्पणी भेजें