डायरी लेखन और स्मृतियाँ
'डायरी' अर्थात 'जो प्रतिदिन लिखी जाए'। हर दिन की
विशेष घटनाएँ-प्रिय अथवा अप्रिय,
जिन्होंने
भी मन पर प्रभाव छोड़ा हो, डायरी में लिखी
जाती हैं।
डायरी लेखन व्यक्ति के द्वारा लिखा गया व्यक्तिगत अभुभवों, सोच और भावनाओं को लेखित रूप में अंकित
करके बनाया गया एक संग्रह है। विश्व में हुए महान व्यक्ति डायरी लेखन करते थे और
उनके अनुभवों से उनके निधन के बाद भी कई लोगों को प्रेरणा मिलती है। डायरी गध
साहित्य की एक प्रमुख विधा है इसमें लेखक आत्म साक्षात्कार करता है। वह अपने आपसे
सम्प्रेषण की स्थिति में होता है।प्राचीन काल में राजा महाराजाओं के समय भी एक
रोजनामचा तैयार किया जाता था जो रोजाना के कार्य और घटनाओं का विवरण देता था।
व्यापारियों दुकानदारों द्वारा भी हिसाब किताब और लेन-देन का ही विवरण सुरक्षित
रखने हेतु बही खाते का प्रयोग किया जाता है यह भी डायरी लेखन माना जाता है। अतः
डायरी लेखन अतिथि मित्रों को और जीवन की भरी हुई घटनाओं को याद करने का एक माध्यम
है।
डायरी लेखन मुख्य चार प्रकार का होता
है
1. व्यक्तिगत
डायरी
2. वास्तविक डायरी
3. काल्पनिक डायरी
4. साहित्यिक डायरी
डायरी लेखन एक ऐसी विधा है जिसमें रिपोटरज, यात्रा वृतांत, रेखाचित्र संस्मरण
की आत्मकथा जैसी कई विधाओं के लक्षण दिखाई देते हैं
डायरी लिखने का उद्देश्य :
(1) व्यक्ति जो बात
दूसरों को समझा पाने अथवा व्यक्त कर पाने में असमर्थ होता है, उसे वह डायरी में लिख लेता है। डायरी सही
अर्थ में एक 'सच्चे मित्र' की तरह होती है, जिसे हम सब कुछ बता सकते हैं। इसमें
प्रतिदिन की विशेष घटनाओं को लिखकर हम उन्हें यादगार बना लेते हैं।
(2) जिस प्रकार हम
फोटो देखकर उस अवसर की याद ताजा कर लेते हैं,
उसी
प्रकार डायरी के माध्यम से हम अतीत में लौट सकते हैं तथा अपने खट्टे-मीठे अनुभवों
को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
(3) प्रसिद्ध व
महान व्यक्ति भी डायरी लिखते थे। उनकी डायरी पढ़कर हम पूरा युग देख सकते हैं। कई
बार यही डायरी आगे चलकर 'आत्मकथा' का रूप ले लेती है। जिससे हम महान
व्यक्तियों के विचारों, अनुभवों व
दिनचर्या के बारे में जान पाते हैं।
डायरी लिखते समय कुछ बातों का ध्यान रखें :
(1) पृष्ठ में सबसे
ऊपर तिथि, दिन तथा लिखने
का समय अवश्य लिखें।
(2) इसे प्रायः
सोने जाने से पहले लिखें, ताकि पूरे दिन
में घटित सभी विशेष घटनाओं को लिख सकें।
(3) डायरी के अंत
में अपने हस्ताक्षर करें, ताकि वह आपके
व्यक्तिगत दस्तावेज बन सकें।
(4) डायरी लिखते
समय सरल व स्पष्ट भाषा का प्रयोग करें।
(5) डायरी में दर्ज
विवरण संक्षिप्त होना चाहिए।
(6) अपने अनुभव को
स्पष्टता से व्यक्त किया जाना चाहिए।
(7) डायरी में
स्थान और तिथि का जिक्र होना चाहिए।
(8) इसमें अपना
विश्लेषण, समाज आदि पर
प्रभाव और निष्कर्ष दर्ज होना चाहिए।
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