Class : 9th Subject : इतिहास Chapter 1 Chapter Name : फ्रॉसीसी क्राति


Class : 9th Subject : इतिहास
Chapter 1 Chapter Name : फ्रॉसीसी क्राति
01 फ्रांस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितियो मे हुई?
Answer 1774 में लुइ 16वे ने राजगद्दी सभाली। उस समय फ्रास 3 एस्टेट्स में बटा हआ था। तृतीय एस्टेट के लोगो ने निम्नलिखित कारणों से तंग आकर 1789 में फ्रांसीसी क्रांति कर दी ।
1. अत्यधिक कर उस समय फ्रास में तृतीय एस्टेट के लोगो से तरह-तरह के कर लिए जाते थे जिसके चलते उनके लिए दो जून की रोटी कमाना भी मुश्किल हो गया था।
2. अमेरिकी युद्ध में हस्तक्षेप- फ्रांस ने ब्रिटेन के खिलाफ युदध में अमेरिका का साथ दिया जिसके चलते फास पर सेना की जरूरते पूरी करने का भार पड़ गया तथा इससे फ्रास पर अरबो रुपए का कर्ज़ चढ़ गया।
3. कम वेतन- फ्रांस में जिस दर पर जनसंख्या बढ़ रही थी उसके मुकाबले खाद्य आपूर्ति कम थी। परिणाम स्वरूप पाव और रोटी की कीमतें बढ़ गई तथा बेहद कम वेतन होने के कारण गरीब लोग खाना नहीं खा पा रहे थे। महिलाओं को बेतन पुरुषो से और कम था इसलिए उन्हें अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
4. उभरता मध्यवर्ग तृतीय एस्टेट के जिन लोगो ने शिक्षा प्राप्त करें उन्हें यह लगने लगा कि कुलीन और पादरियों की सामाजिक हैसियत जन्मजात थी। शिक्षित मध्यवर्ग को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने यह कहना प्रारंभ किया कि सामाजिक हैसियत योग्यता के आधार पर तय होनी चाहिए ना की जन्म के आधार पर।
5. विचारको का योगदान- उस समय के कुछ दार्शनिक हो जैसे कि जॉन लॉक और रूसो ने स्वतंत्रता समानता और भाईचारे की बात की। इनके विचारों की चर्चा समूचे फ्रास में होने लगी जिसने काति को एक वैचारिक आधार प्रदान किया। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उपरोक्त कारणों के चलते परेशान जनता ने क्राति का सहारा लिया जो आगे चलकर फ्रास में गणतंत्र की स्थापना का कारण बनी।
Q2 फ्रासीसी समाज के किन तबको को क्राति का फायदा मिला? कौन से समूह सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर हो गए? क्रांति के नतीजों से समाज के किन समूह को निराशा हुई होगी?
Answer 1789 की फ्रासीसी क्राति के बाद वहा सविधान का निर्माण हआ तथा संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हई। इस सविधान ने अनेक प्रकार के अधिकारों की बात की जिसका सबसे ज्यादा फायदा तृतीय एस्टेट के उन लोगों को मिला जिसमें अमीर और गरीब दोनों शामिल थे यथा व्यवसायी, वकील, किसान, महिला कारीगर, मजदूर इत्यादि। आबादी के बड़े हिस्से को प्रधान का अधिकार मिला। इसका लाभ यह था कि अब आम जनता न्यायपालिका और व्यवस्थापिका में अपने पसंद के प्रतिनिधि भेज सकती थी। हालाकि कुछ लोग अभी में मतदान के अधिकार से वचित थे जिनमें कम कर देने वाले लोग तथा महिलाएं शामिल थी। इस नई व्यवस्था की स्थापना के बाद फ्रांस में प्राचीन राजतंत्र की व्यवस्था समाप्त हो गई जिसके अतर्गत कलीन और पादरी वर्ग के लोग सत्ता छोड़ने के लिए विवश हो गए। इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं की सविधान में सभी नागरिको के समान अधिकारों की बात करी थी परतु फिर भी तृतीय एस्टेट के अंदर ही गरीब नागरिक और महिलाए सरकार की व्यवस्था से अप्रसन्न थे। अत्यधिक क्रातिकारी गतिविधियों के चलते परिस्थितिया फिर से वैसे ही हो रही थी जैसी प्राचीन राजतंत्र के समय थी। अत्यधिक कर के परिणामस्वरूप लोग रोटी नहीं खरीद पा रहे थे। महिलाओं की दशा खराब थी, अभी भी विद्यालयों में शिक्षा के लिए दाखिला नहीं लिख सकती थी। जो महिलाए व्यवसाय करती थी उन्हें पुरुषों की तुलना में वेतन कम ही दिया जाता था। अतः हम कह सकते हैं कि क्राति की समाप्ति के बाद जिस तरह की फ्रास की कल्पना की गई थी उसमें और सुधार की आवश्यकता थी जो समय के साथ पूरी हुई।
03 19वी और 20वीं सदी की दुनिया के लिए फ्रासीसी क्रांति कौन सी विरासत छोड़ गई?
Answer इतिहास में 1789 की फासीसी क्राति एक विशेष स्थान रखती है। इस क्राति ने संपर्ण विश्व में एक वैचारिक पुनर्जागरण का प्रचार किया। फ्रास की क्राति ने यूरोप में अन्य राजशाही तत्रो के पतन के लिए आमजन को हिम्मत प्रदान की जिसकी परिणति यूरोप के अन्य देशों में भी गणतंत्र की स्थापना में के समय में भी उतनी ही ज्वलत हैं। इस क्राति ने वर्ग भेद, महिला सशक्तिकरण, स्वतंत्रता, उदारता, भाईचारे, एकता और सविधान जैसे विषयो पर सपूर्ण विश्व का ध्यान आकर्षित किया। फ्रासीसी क्राति ने अनेक उपनिवेशो को आजादी दिलाने में भी मदद की, सामतवादी विचारधारा के अत की शुरुआत इसी क्राति ने करी। अमेरिका और भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतत्र के सविधानो पर भी 1789 की क्राति का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। इस प्रकार यह कहना सही होगा कि फ्रासीसी क्राति उन्नीसवीं और बीसवी सदी के लिए अनेक विरासतें छोड़ गई।
04 उन जनवादी अधिकारो की सूची बनाए जो आज हमें मिले हए है और जिन का उद्गम फासीसी क्राति
Answer आज के युग मे जिन सामान्य से दिखने वाले अधिकारों की हम चर्चा करते है उनका उद्गम फ्रांसीसी क्राति से ही है। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण इस प्रकार है
1. स्वतंत्रता का अधिकार- स्वतंत्रता मनुष्य का नैसर्गिक अधिकार है। किसी भी तरह का अंकुश मनुष्य के विकास को रोकता है।
2. समानता का अधिकार- राज्य का कानून और संविधान सभी के लिए एक समान होता है। गरीब, अमीर, जवान, वृद्ध सभी कानून की दृष्टि में एक समान होते हैं।
3. धर्मनिरपेक्षता का अधिकार सभी धर्मों के प्रति समान आदर भाव एक खुशहाल समाज की नितांत आवश्यकता है। सभी व्यक्तियों को अपना धर्म पालन करने का अधिकार है।
4. अभिव्यक्ति का अधिकार- एक सभ्य समाज में सभी को बोलने, लिखने, दिखाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। फ्रांस ने 18वी सदी के उत्तरार्ध में ही सेंसरशिप समाप्त की थी, जबकि अग्रेज भारत में अखबारो पर भी पाबंदी रखते थे।
5. मतदान का अधिकार- सभी नागरिको, विशेषकर महिलाओ के लिए मताधिकार समाज में सभी की राजनीतिक भागीदारी को दर्शाता है। अतः हम कह सकते है कि इन सभी महत्वपूर्ण जनवादी अधिकारों का उगम फ्रासीसी क्राति से ही है।
05 क्या आप इस तर्क से सहमत है कि सार्वभौमिक अधिकारो की संदेश में नाना अतर्विरोध थे?
Answer यह सत्य है कि राजशाही के अंत के बाद फ्रांस की संवैधानिक राजतंत्र व्यवस्था ने नागरिकों को अनेक अधिकार दिए, परतु उनमें निम्नलिखित अतर्विरोध भी थे समानता की बात करते हए भी फ्रास में सभी नागरिको को मतदान का अधिकार नही दिया था। लगभग 30 लाख पुरुषों, महिलाओ, बच्चो और 25 वर्ष से कम उम्र के पुरुष जो 3 दिन की मजदूरी के बराबर कर नहीं चुका सकते थे उन्हें निष्क्रिय नागरिक' माना गया व मताधिकार से वचित रखा।
महिलाओं की दशा खराब ही थी। उन्हें समान वेतन नहीं मिलता था, अधिकतर के पास पढ़ाई लिखाई, व्यवसाय के अवसर नहीं थे। गरीब महिलाओ की दशा और भी दयनीय थी। हालांकि सामाजिक व आर्थिक अधिकार कुछ समय के बाद ही दिए गए थे परंतु राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहा।
संविधान में केवल पुरुष व नागरिक अधिकार घोषणा पत्र ही था। कुछ साल बाद ओलप दे गूज़ नामक महिला ने महिला व नागरिक अधिकार घोषणा पत्र बनाया परंतु इस पर उन्हें देशद्रोही बता कर फासी दे दी गई।
  कोबिनो ने महिलाओ को पुरुषों के समान कभी नहीं माना। अतः यह समानता के अधिकार काअतर्विरोध ही था। उपरोक्त सभी अतर विरोधियों के बावजूद भी उस समय का फ्रास का सविधान काफी आधुनिक माना जा सकता है जिसने समय रहते इन सभी अतर्विरोध को दूर कर दिया था।
06 नेपोलियन के उदय को कैसे समझा जा सकता है?
Answer. क्रांति के बाद अनेक प्रकार की सरकार फ्रांस में बनी। जैकोबिन सरकार के पतन के बाद मध्यम वर्ग ने सत्ता संभाली। विधान परिषदों में 5 सदस्यों वाली एक डिरेक्ट्री नामक कार्यपालिका बनाई गई। डिरेक्ट्री का हमेशा विधान परिषद से विवाद रहता था। इसके चलते राजनीतिक अस्थिरता जन्मी जिसने नेपोलियन बोनापार्ट के उदय का मार्ग प्रशस्त किया। 1804 में फास का सम्राट बनने के बाद नेपोलियन ने साम्राज्य प्रसार की नीति अपनाई। नेपोलियन एक तानाशाह था। उसने अपने करीबी रिश्तेदारों को सत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण पद दे दिए। प्रारंभ में नेपोलियन की जीत फ्रांस में सराही जाती रही, पर कुछ समय बाद उसकी नीतियों का असर साफ हो गया। नेपोलियन ने युद्ध का सहारा लिया जिससे पूरे यूरोप में प्रतिशोध पनपने लग गया था। नेपोलियन ने यूरोप को आधुनिक बनाने का प्रयत्न किया पर वह उन विचारो की विपरीत हुआ जिसके लिए फ्रांसीसी क्रांति याद की जाती है।

2 टिप्‍पणियां:

Ankit mishra. ने कहा…

Keep it up sir ❤❤

Ankit mishra. ने कहा…

Sir bhut mast kaam ho aap tqq.