बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता



द्वितीय पाठ- बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता
हिन्दी अर्थ
1.      कस्मिंश्चित् वने............................................................................................... एव विचिन्त्य|
किसी वन में खरनखर नामक एक शेर रहता था | एक दिन की बात है ,वह बहुत भूखा था और भूख से व्याकुल होकर वह जंगल में खाने के खोज में इधर-उधर घूम रहा था | पर उसे भोजन कहीं नहीं मिला |सूर्यास्त के समय उसे एक बड़ी गुफा दिखी , उस गुफा को देखकर उसने सोचा, " अवश्य रात में कोई जीव इस गुफा में आएगा | अतः मुझे यहीं छिपकर रहना चाहिए | " शेर वहां छिपकर इंतजार करने लगा ताकि कोई जीव आये और वह उसे अपना भोजन बना ले ।इस अंतराल में गुफा का स्वामी दधिपुच्छ नामक सियार वहां आता है | जब वह वहां देखता है तब उसे पता चलता है की शेर के पैरों के निशान गुफा अन्दर तो गए हैं पर बाहर नहीं आये हैं ( इसका मतलब शेर अभी भी गुफा के अन्दर है) सियार ने सोचा - " अब तो मैं मरूंगा! अवश्य ही मेरे बिल में एक शेर है | अब मैं क्या करूँ ?"
2.       दूरस्थः रवं ..............................................................................................................अधिको भवेत्|
कुछ सोच कर सियार कुछ दूरी पर जाकर बोलता है -" हे बिल! हे बिल! क्या तुम्हे नहीं याद है, मेरी तुम्हारे साथ शर्त कि जब मैं यहाँ बाहर आऊँगा तब तुम मेरा आह्वान ( पुकारना) करोगी | यदि तुम मेरा आह्वान नहीं करोगी तो मैं दुसरे बिल में रहने चला जाऊंगा|यह सुनकर शेर सोचता है " अवश्य ही यह गुफा अपने स्वामी का सदा आह्वान करती हो होगी परन्तु अभी यह गुफा मेरे डर से ऐसा नहीं कर रही है। अतः यह सही कहा गया है - डरे हुए मन वालों की बोलने और हाथ-पैर आदि की क्रिया नहीं प्रयुक्त होती हैं और वे अधिक कांपते हैं।"
3.       तदहम् अस्य ................................................................................................................. मे श्रुता |
तो अब मै आह्वान करूंगा और इस बिल में मेरा भोजन आएगा "| यह सोचकर शेर ने अचानक सियार का आह्वान किया | शेर की ऊची दहार से पूरी गुफा गूंज उठी और बहुत जोर से आवाज निकली | जिससे सारे पशु भयभीत हो उठे | सियार भी दूर पलायन करके इसे पढता है - आने वाले दुःख के बारे में जो सोचता है ( और उसे हल करता है) वह सुखी रहता है | जो ऐसा नहीं करता वह दुखी रहता है | मैं इस जंगल में रहकर बूढा हो चूका हूँ पर मैंने कभी बिल की आवाज़ नहीं सुनी।

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