शरारत पर डायरी लेखन


शरारत 

मैं अपने बचपन की बात करूं तो मैं बहुत शरारती था 
| सबसे लड़ना और मारना तंग करना | एक बार मैंने स्कूल में अपने साथ वाले लड़की का पूरा खाना  खा लिया और उसे बताया भी नहीं , जब उसे पता चला वह  बहुत रोई और उसने मैडम से शिकायत लगा दी | मैडम  से स्कूल में बहुत मार पड़ी | यह बात घर तक पहुंच गई | घर पर आकर भी मार पड़ी | जब धीरे-धीरे बड़े समझ आने लगा | शरारतें में बचपन अच्छी लगती है|दो साल पहले की बात है मैं आठवीं कक्षा में पढ़ता था। मेरी छोटी बहन पांचवी कक्षा में पढ़ती थी। रविवार का दिन था माता पिता जी किसी काम से घर के बाहर गए हुए थे। हम दोनों भाई बहन घर पर अकेले थे। हम आपस में खेल रहे थे तभी मुझे शरारत सूझी और मैंने अपनी बहन पर पानी फेंक दिया। बदले में वह भी मुझ पर पानी फेंकने लगी। यह सिलसिला चलता रहा हम एक दूसरे के ऊपर पानी फेंक कर रहे और पूरा बिस्तर गीला कर दिया। घर का और कुछ सामान भी पानी से भीग चुका था। जब माता पिता जी घर आए तब उन्होंने देखा कि घर में सारा समान और बिस्तर पानी से गीला हो चुका है। उन्होंने हमें बड़ी डांट लगाई और आगे से ऐसा ना करने की नसीहत दी। डांट सुनकर हमने भी निश्चय किया कि आगे से हम इस तरह की शरारत नहीं करेंगे।
अभिषेक कुमार मिश्रा

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